25 Jul 2017

लबों पर उसके कभी बददुवा नही होती

लबों पर उसके कभी बददुवा नहीं


लबों परउसके कभी बददुवा नहीं होती


बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है

माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू

मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा

मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है




माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती हैए अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया

माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया

मेरी ख्वाहिश* है की मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊँ

माँ से इस तरह लिपटूँ कि बच्चा हो जाऊँ

माँ के आगे यूँ कभी खुलकर नहीं रोना

जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है

मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी मुस्कराती है




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